Supreme Court का अनिल अंबानी को नोटिस, अवमानना का चल सकता है मुकदमा
Ericsson ने अंबानी को बकाया नहीं देने तक सिविल प्रिजन में रखने की मांग की
नई दिल्ली. रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड के मालिक अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें Ericsson कंपनी का बकाया न देने के चलते नोटिस भेजा है। कोर्ट ने अंबानी से पूछा है कि क्यों नहीं उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मामला चलाया जाए। एरिकसन कंपनी ने अपने बकाए नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की याचिका दायर करते हुए कार्रवाई की मांग की थी। अनिल अंबानी Ericsson के 550करोड़ रुपए नहीं चुका पाए हैं। कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी मांग की कि जब तक अंबानी कंपनी के पैसे न चुका दें, तब तक उन्हें सिविल प्रिजन में रखा जाए।
जस्टिस आर एफ नरीमन की अगुवाई वाली बेंच ने Rcom को अनुमति दी है कि वह 118 करोड़ रुपए जमा कराए। Rcom ने इस रकम को दो डिमांड ड्राफ्ट्स के जरिए चुकाने का ऑफर दिया है।
दोनों भाइयों को दिया बैठकर मामला सुलझाने का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस जियो इंफोकॉम के मालिक मुकेश अंबानी और आरकॉम के मालिक अनिल अंबानी के साथ में बैठकर बकाया भुगतान के इस मामले को सुलझाने का सुझाव दिया। दरअसल अनिल अंबानी इस इंतजार में हैं कि मुकेश अंबानी की कंपनी Reliance Jio Infocommउनके स्पेक्ट्रम खरीदने के बाद जो पैसा देंगे उससे वे सारे भुगतान कर देंगे। लेकिन मुकेश अंबानी इस डील के लिए अनिल अंबानी की तरफ से गारंटी देने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में कोर्ट ने कहा कि जब तक दोनों कंपनियां आपस में मामले को नहीं सुलझा लेते, तब तक हम कुछ नहीं कर सकते।
क्या है पूरा मामला
अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन पर स्वीडन की टेलीकॉम कंपनी Ericsson के 550 करोड़ रुपए बकाया हैं। 2014 में एरिक्सन ने रिलायंस कम्युनिकेशन के साथ सात साल की डील साइन की थी जिसके तहत Ericsson कंपनी देशभर में Rcom के टेलीकॉम नेटवर्क को ऑपरेट और मैनेज करती। 2016 से रिलायंस की तरफ से भुगतान न किए जाने पर एरिक्शन कंपनी ने सितंबर, 2017 में National Company Law Tribunal (NCLT) में Rcom और उसकी दो सब्सिडियरी कंपनियों Reliance Infratel और Reliance Telecom के खिलाफ केस दर्ज कराया। रिलायंस कम्युनिकेशन की तरफ से कई बार भुगतान की बात कही गई है, लेकिन अब तक भुगतान रुका हुआ है।
भाई से आस लगाए हैं अनिल
अनिल अंबानी ने उधार के बोझ तले दबी अपनी कंपनी को उबारने के लिए अपने भाई मुकेश अंबानी से मदद मांगी। उन्होंने अपने वायरलेस असेट्स को अपने भाई की कंपनी Reliance Jio Infocomm को बेचने की पेशकश की। इसके तहत जियो इंफोकॉम को Rcom के टॉवर्स और एयरवेव्स मिलते, जिन्हें अनिल अंबानी ने कई बैंकों के पास गिरवी रखा था। यह डील 18,100 करोड़ रुपए में तय की गई थी। इस सौदे की घोषणा दिसंबर 2017 में की गई थी और इसके मार्च, 2018 में क्लीयर होने की संभावना थी, लेकिन यह रुक गई। दरअसल इस डील को डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिकेशन (DoT) की तरफ से no-objection certificate नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवंबर को इस सेल को क्लीयरेंस दी, लेकिन इसके लिए शर्त रखी कि अनिल अंबानी दो दिन में सरकार के पास 1,400 करोड़ रुपए बैंक गारंटी के तौर पर जमा कराएंगी। यह राशि सिक्योरिटी के तौर पर दिए जाने वाले जमीन के टुकड़े के अतिरिक्त जमा करनी थी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह गारंटी मिलने के एक सप्ताह के अंदर नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी करे। लेकिन रिलायंस जियो द्वारा Rcom की पेमेंट लाइबिलिटी को जारी रखने से मना करने के बाद DoT की तरफ से इस डील के लिए NOC नहीं दिया गया।

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