मोदी सरकार/ सवर्णों को आरक्षण: जानें किसे मिलेगा फायदा..




लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने बड़ा दांव फेंक दिया है। केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों के लिए सरकारी नौकरियों एवं शिक्षण संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद से ही जहां एक ओर यह बहस छिड़ गई है कि इस आरक्षण का रूप क्या होगा वहीं अब बड़ा सवाल यह भी है कि क्या और कैसे लागू होगा।
सरकार इस आरक्षण को लागू करने के लिए मंगलवार को संसद में संशोधन विधेयक पेश करेगी। इसे संसद में केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत पेश करेंगे। यहां यह बता देना जरूरी है कि सरकार के इस फैसले से एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण की पुरानी व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी।
मोदी सरकार का सवर्णों को आरक्षण देने का फैसला 2019 के लोकसभा चुनावों में बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में मिली भाजपा की हार की एक वजह एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ सवर्णों की नाराजगी भी बताई जा रही है। आज सवर्णों को जिस तरह से सरकार ने आरक्षण का यह मरहम लगाया है इससे यह माना जा रहा है कि गरीब सवर्णों को अपने पाले में करने का दांव खेला है।
भाजपा सांसद एवं दलित नेता उदित राज ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है। इससे पहले भी कई राजनेता गरीब सवर्णों को आरक्षण देने की बात कहते रहे हैं। पिछले दिनों भाजपा के थिंक टैंक और आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत ने सवर्णों को आरक्षण देने की वकालत की थी।
अभी क्या है आरक्षण की व्यवस्था
अभी सरकारी नौकरियों में फिलहाल 49.5 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है। इससे अधिक आरक्षण के लिए सरकार को मौजूदा आरक्षण कानून में संशोधन करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 50फीसदी से अधिक आरक्षण पर रोक लगाई है। सरकार ने 10 फीसदी ईबीसी (आर्थिक रूप से पिछड़ा) कोटा का प्रस्ताव किया है।
कैबिनेट के सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने के फैसले से पहले अनुसूचित जाति (एससी) को 15 फीसदी, अनुसूचित जनजाति (एसटी) को 7.5 फीसदी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है।
आरक्षण का किसको होगा फायदा
कैबिनेट के इस ऐतिहासिक फैसले का लाभ राजपूत, ब्राह्मण, भूमिहार, बनिया सहित आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को मिलेगा। आर्थिक रूप से पिछड़े इन वर्गों को 10 फीसदी आरक्षण का लाभ दाने के लिए सरकार को अनुच्छेद 15 एवं 16 में स्पेशल क्लॉज जोड़कर संवैधानिक संशोधन करने होंगे।
क्या है अनुच्छेद 15 और 16
आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण के दायरे में लाने के लिए केंद्र सरकार को संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में संशोधन करना होगा। आईए देखते हैं कि इन अनुच्छेदों में आरक्षण संबंधी प्रावधान  क्या हैं:
 अनुच्छेद 15- सामाजिक समता का अधिकार दिया गया है जिसके अनुच्छेद 15(4) में आरक्षण संबधी प्रावधान है।
अनुच्छेद 15 (4)- इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29 के खण्ड (2) की कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिये या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबन्ध करने से निवारित नहीं करेगी।
अनुच्छेद 16-  समता के अधिकार के अंतर्गत आता है। अनुच्छेद 16 लोक नियोजन के अवसर की समता की बात करता है।
अनुच्छेद 16(4)- राज्य पिछड़े हुए नागरिकों के किसी वर्ग को जिसका सरकारी सेवाओं पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीँ है, पदों के आरक्षण के लिए व्यवस्था कर सकता है।
(मण्डल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ऐसी व्यवस्था की जा चुकी है।)
अनुच्छेद 16(5)- किसी धार्मिक या साम्प्रदायिक संस्था के कार्य से सम्बंधित कोई पद उस विशिष्ट धर्म या विशिष्ट सम्प्रदाय के व्यक्ति के लिए आरक्षित किया जा सकता है, जिससे वह संस्था संबद्घ है।
कौन आएंगे इनके दायरे में
मोदी कैबिनेट ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों के लिए सरकारी नौकरियों एवं शिक्षण संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला तो किया है लेकिन इसके पीछे कई क्लॉज भी हैं। आर्थिक रूप से पिछड़ा बताने के लिए आपको इन छह दायरों में भी पिछड़ा साबित होना होगा।
1. जिनकी वार्षिक आय 8 लाख तक या उससे कम होगी।
2. कृषि भूमि पांच एकड़ से कम होनी चाहिए
3. जिसका 1000 वर्ग फुट से कम जमीन पर मकान बना है
4. कस्बों में 200 गज जमीन वालों को, शहरों में 100 गज जमीन वालों को, प्लॉट 100 गज से कम होना चाहिए और नगर निगम से अधिसूचित होना चाहिए
5. अगर निगम से अधिसूचित नहीं है तो 200 गज तक भी हो सकता है।
6. राजपूत, भूमिहार, बनिया, जाट, गुर्जर को इस श्रेणी में आरक्षण मिलेगा
7. आरक्षण शिक्षा (सरकार या प्राइवेट), सार्वजनिक रोजगार में इसका लाभ मिलेगा
8. इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन होगा
क्या है आरक्षण का उद्देश्य
आरक्षण देने का उद्देश्य केंद्र और राज्य में शिक्षा के क्षेत्र, सरकारी नौकरियों, चुनाव और कल्याणकारी योजनाओं में हर वर्ग की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए की गई। जिससे समाज के हर वर्ग को आगे आने का मौका मिले।
कब उठी थी आरक्षण की मांग
आपको बता दें कि आरक्षण की शुरुआत आजादी के पहले प्रसिडेंसी और रियासतों में पिछड़े वर्गों के लिए शुरू हुई थी। 1901 में महाराष्ट्र में कोल्हापुर के महाराजा छत्रपति साहूजी महाराज ने गरीबी दूर करने के लिए पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण की शुरुआत की थी। इसके बाद अंग्रेजों ने 1908 में आरक्षण शुरू किया था।
मद्रास प्रेसिडेंसी ने 1921 में 44 फीसदी गैर-ब्राह्मण, 16-16 फीसदी ब्राह्मण, मुसलमान और भारतीय-एंग्लो/ईसाई को और अनुसूचित जातियों को लोगों को फीसदी आरक्षण दिया गया था। इसके बाद 1935 में भारत सरकार अधिनियम के तहत लोगों को सरकारी आरक्षण सुनिश्चित किया था। बाबा साहब अम्बेडकर ने 1942 में सरकारी सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण की मांग उठाई थी।

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