सबरीमाला 800 साल में पहली बार 2 महिलाओं ने मंदिर में किया प्रवेश, पूजा भी की भगवान अयप्पा की



सबरीमाला में पिछले 800 सालों से प्रतिबंधित है 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश।
* मंदिर में प्रवेश करने वाली बिंदु और कनकदुर्गा की उम्र 40 से 50 साल के बीच, पुलिस सुरक्षा में पहुंचीं मंदिर
* सुप्रीम कोर्ट ने महीने पहले सबरीमाला में हर उम्र की महिला को दर्शन की अनुमति दी थी
तिरुवनंतपुरम. केरल के सबरीमाला मंदिर में बुधवार तड़के 50 साल से कम उम्र की दो महिलाओं ने प्रवेश किया। इसके बाद मंदिर को शुद्धिकरण के लिए बंद कर दिया गया। मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने महिला श्रद्धालुओं को पूरी सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट से सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिलने के लगभग तीन महीने बाद आज पहली बार महिलाओं ने सबरीमाला में भगवान अयप्पा के दर्शन किए। 
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मंदिर में प्रवेश करने वाली महिलाओं के नाम बिंदु और कनकदुर्गा हैं। उनकी उम्र 40 से 50 साल के बीच बताई जा रही है। दोनों महिलाएं पुलिसकर्मियों के साथ मंदिर में घुसीं और सुबह 3:45 बजे पूजा-अर्चना की। इन दोनों महिलाओं ने पिछले महीने भी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी।
दौड़ती हुई मंदिर के अंदर पहुंचीं
दोनों महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने का सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं। वे दौड़ती हुए मंदिर के अंदर जाती नजर आ रही हैं।
 एक दिन पहले महिलाओं ने बनाई थी 620 किमी लंबी श्रृंखला
सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश का विरोध करने वालों के खिलाफ महिलाओं ने मंगलवार को 620 किमी लंबी श्रृंखला बनाई थी। यह श्रृंखला कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक बनाई गई। लिंग समानता के संदेश के साथ बनाई गई इस श्रृंखला में लाखों की संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।इसकी अगुवाई स्वास्थ्य मंत्री शैलजा ने की। इसमें लेखिका, राजनेता, अभिनेत्री शामिल हुईं। सीपीएम नेता वृंदा करात भी इसमें खड़ी हुईं एलडीएफ का दावा के ही इस श्रृंखला में 30 लाख से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया। यह 14 जिलों से होकर गुजरी। साथ ही करीब 150 से अधिक सामाजिक संगठन भी शामिल हुए।
 800 साल से चली आ रही प्रथा
28 सिंतबर को सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में हर महिला के प्रवेश की इजाजत दी। इस फैसले के खिलाफ केरल के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। हालांकि, अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया। इससे पहले यहां 10 से 50 साल उम्र की महिला के प्रवेश पर रोक थी। यह प्रथा 800 साल पुरानी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरे राज्यभर में विरोध हो रहा है।
आदेश के बाद 3 बार खुला मंदिर
आदेश के बाद 16 नवंबर को तीसरी बार मंदिर खोला गया। मंदिर 62 दिनों की पूजा के लिए खुला, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी विरोध के चलते जनवरी तक कोई महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई थी।

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