टीम इंडिया के कप्तान विराट 2011 से झेल रहे हैं दर्द.



सिडनी। भारतीय कप्तान विराट कोहली अपनी शानदार फिटनेस को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन उन्होंने बताया है कि पीठ दर्द की परेशानी उन्हें वर्ष 2011 से ही है लेकिन इसका असर उनके करियर पर कभी नहीं पड़ा।
ऑस्ट्रेलिया दौरे में भारतीय टीम का नेतृत्व कर रहे विराट ने गुरुवार से सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर शुरू होने वाले चौथे और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के आखिरी टेस्ट मैच की पूर्व संध्या पर कहा फिटनेस को लेकर छोटी-मोटी परेशानी हर खिलाड़ी को होती है जो आम बात है।
30 वर्षीय बल्लेबाज़ ने अपनी फिटनेस समस्या के सवाल पर कहा कि मुझे पीठ में दर्द और खिंचाव की शिकायत वर्ष 2011 से ही है जो नई बात नहीं है। तीसरे मेलबोर्न टेस्ट में भारतीय कप्तान को मैच के दूसरे दिन फिजियो से अपनी पीठ दर्द के लिए उपचार कराना पड़ा था। वह पहली पारी में 82 रन पर आउट हो गए थे, जबकि दूसरी पारी में शून्य पर आउट हो गए थे।
विराट को पिछले काफी समय से पीठ दर्द से जूझते देखा गया है। इस वर्ष भी इंग्लैंड में दूसरे टेस्ट के दौरान उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा था जिसके बाद उनकी फिटनेस को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए थे। हालांकि मौजूदा समय में वह आईसीसी रैंकिंग में नंबर एक टेस्ट बल्लेबाज़ हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से शारीरिक रूप से मैंने इस परेशानी से उबरने के लिए काफी काम किया है, इसलिए यह बड़ी समस्या नहीं है। आप इसी तरह इनसे निपट सकते हैं।
भारतीय कप्तान ने कहा कि वह इस बात की कोई चिंता नहीं कर रहे हैं और सिडनी मैच को लेकर पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जब काम बहुत बढ़ जाता है तो अकड़न जैसी परेशानी हो जाती है, लेकिन यह गंभीर समस्या नहीं है। आप दो तीन दिनों में ठीक हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि मैं इस बात की ज्यादा चिंता नहीं करता हूं। आपको चोटों से उबरने के लिए शारीरिक रूप से खुद को मजबूत करना होता है। मुझे पता है कि इससे निपटने के लिए मैं कोई विकल्प तलाश लूंगा। बिना इन छोटी-मोटी परेशानियों के इतना लंबे समय तक खेलना तो संभव भी नहीं है।
विराट की कप्तानी में सिडनी टेस्ट जीतने के साथ ही भारत ऑस्ट्रेलिया जमीन पर 70 वर्षों में पहली बार टेस्ट सीरीज़ जीतकर इतिहास रचने की दिशा में अग्रसर है। वह फिलहाल चार मैचों की सीरीज़ में 2-1 से बढ़त पर है जबकि विराट इस जीत के साथ विदेश में सर्वाधिक टेस्ट जीतने वाले पहले भारतीय कप्तान बनने से भी एक कदम दूर हैं। वह फिलहाल सौरभ गांगुली के 11 टेस्ट जीतने की बराबरी पर हैं। 

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