लंदन 14,000 करोड़ रु के फ्रॉड में क्रेडिट सुइस बैंक के 3 पूर्व कर्मचारी गिरफ्तार, इनमें एक भारतीय



* दक्षिण अफ्रीकी देश मोजाम्बिक की सरकारी कंपनियों को दिए गए लोन से जुड़ा मामला 
क्रेडिट सुइस और वीटीबी बैंक की लंदन स्थित शाखाओं से लोन दिया गया था
* भारतीय मूल का सुरजन सिंह फरवरी 2017 तक क्रेडिट सुइस के ग्लोबल फाइनेंसिंग ग्रुप में एमडी था
* आरोपियों पर न्यूयॉर्क की अदालत में केस चल रहा है, अमेरिका तीनों के प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहा
* अमेरिका का कहना है कि आरोपियों ने यूएस के निवेशकों से धोखा किया
लंदन. 14,000 करोड़ रुपए (2 अरब डॉलर) के लोन घोटाले के मामले में क्रेडिट सुइस बैंक के 3पूर्व कर्मचारी गुरुवार को गिरफ्तार किए गए। इनमें एक भारतीय मूल का है। एंड्रयू पीअर्स (49),सुरजन सिंह (44) और डेटेलिना सुबेवा (37) को लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, बाद में जमानत मिल गई। अमेरिका इन तीनों का प्रत्यर्पण चाहता है। इन पर अमेरिका के रिश्वत विरोधी कानून का उल्लंघन करने की साजिश रचने, मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के आरोप हैं। न्यूयॉर्क की अदालत में इनके खिलाफ केस चल रहा है।
मोजाम्बिक के पूर्व वित्त मंत्री भी आरोपी
1. अमेरिका के वकील के मुताबिक तीनों आरोपी दक्षिण अफ्रीकी देश मोजाम्बिक की सरकारी कंपनियों को फर्जीवाड़ा कर दिए गए लोन के मामले में शामिल थे। इस मामले में मोजाम्बिक के पूर्व वित्त मंत्री मैनुएल चांग (63) की इसी हफ्ते दक्षिण अफ्रीका में गिरफ्तारी हुई थी।
2. क्रेडिट सुइस बैंक का कहना है कि तीनों आरोपी पूर्व कर्मचारियों ने बैंक के आंतरिक नियंत्रण को फेल करने और निजी फायदे के लिए काम करते हुए लोन से जुड़ी जानकारियां छिपाने की कोशिश की।
3. इस मामले में एक अन्य आरोपी जेन बोस्तानी बुधवार को न्यूयॉर्क से गिरफ्तार किया गया था। मूल रूप से लेबनान निवासी बोस्तानी मोजाम्बिक की कंपनियों से जुड़े अबू धाबी के कॉन्ट्रैक्टर के लिए काम करता है।
4. क्या है पूरा मामला ?
*  साल 2013 से 2016 के बीच मोजाम्बिक की सरकारी कंपनियों ने क्रेडिट सुइस और वीटीबी बैंक की लंदन स्थित शाखाओं से 14,000 करोड़ रुपए से ज्यादा लोन लिया था। मोजाम्बिक की सरकार लोन की गारंटर थी। साल 2016 से कंपनियों ने लोन चुकाने में डिफॉल्ट करना शुरू कर दिया।
आरोपों के मुताबिक चांग के वित्त मंत्री रहते हुए मोजाम्बिक में मैरीन प्रोजेक्ट्स के लिए 3सरकारी कंपनियां बनाई गई थीं। लेकिन, इन्हें बनाने का मकसद चांग, बोस्तानी और तीनों आरोपी बैंकर्स को फायदा पहुंचाना था।
* लोन की रकम में से 1400 करोड़ रुपए पांचों आरोपियों और मोजाम्बिक के कुछ अधिकारियों को डायवर्ट किए गए। आरोपियों ने अमेरिकी समेत दूसरे देशों के निवेशकों को गुमराह किया

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