Interview/ भारत की सत्ताधारी पार्टी मुस्लिम और पाक विरोधी, उन्होंने शांति की हर कोशिश नाकाम की: इमरान
* इमरान ने कहा- अमेरिका के लिए पाक किराए कीबंदूक जैसा नहीं, संबंध बराबरी के आधार पर होंगे
* आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में अमेरिका के साथ थापाक, हमारे 80 हजार लोग मारे गए लेकिन उन्होंनेभरोसा नहीं किया
इस्लामाबाद. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नेकहा है कि भारत की सत्ताधारी पार्टी (भाजपा) मुसलमानऔर पाक विरोधी है। उन्होंने मेरी तरफ से की गई शांतिकी हर कोशिश को नाकाम कर दिया। इमरान ने यहबात वॉशिंगटन पोस्ट को दिए इंटरव्यू में कहीं। जुलाई मेंचुनाव जीतने के बाद अपने पहले संबोधन में इमरान ने कहा था कि भारत एक कदम आगे बढ़ेगा तो हमदो कदम चलेंगे। हाल ही में पाक ने भारत को सार्क समिट में शामिल होने का न्योता दिया था। इस परभारत ने कहा था कि बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं हो सकते।
‘मुंबई हमले के बारे में जानकारी ले रहा हूं’
1. भारत मुंबई हमले के अपराधियों को सजा होते देखना चाहता है, इस सवाल पर इमरान ने कहा- मैंनेसरकार से केस की हालिया स्थिति पता करने को कहा है। यह आतंकवाद से जुड़ा मसला था, हम इसेसुलझाना चाहते हैं। मुझे उम्मीद है कि जब भारत में चुनाव हो जाएंगे तो दोनों देशों में बातचीत शुरू होसकेगी।
2. इमरान ने कहा- पाक किसी आतंकी या आतंकी गुट को देश में पनाह नहीं दे रहा। जबसे मैं सत्ता मेंआया हूं, सुरक्षाबलों से मुझे बाकायदा जानकारी मिल रही है। मैं अमेरिका से पूछना चाहता हूं कि हमारेयहां आतंकी गुट कहां सक्रिय हैं? अगर अफगान सीमा पारकर 2-3 हजार तालिबान हमारे यहां आ गए हैंतो उन्हें अफगान शिविरों में भेज दिया जाएगा।
3. इमरान के मुताबिक- पाक का 9/11 से कोई लेना-देना नहीं है। ओसामा अफगानिस्तान में था, इसमेंकिसी पाकिस्तानी की भूमिका नहीं थी। 1980 के दशक में पाक ने अफगानिस्तान में सोवियत सेनाओं केखिलाफ अमेरिका की मदद की, लेकिन उसे इसका नुकसान ही उठाना पड़ा। आतंकवाद के खिलाफ युद्धमें हमारे 80 हजार लोग मारे गए। 150 अरब डॉलर (करीब 10.58 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ।हमारे यहां न तो निवेशक आते हैं और न ही खेलने के लिए कोई टीम।
‘आत्मसम्मान के साथ रिश्ता रखेंगे’
4. इमरान ने कहा- अगर अमेरिका यह समझता है कि वह पाक को अपने मंसूबे पूरे करने के लिए किराएकी बंदूक की तरह इस्तेमाल करेगा तो ऐसे में रिश्ता नहीं चल सकता। हम आत्मसम्मान के साथअमेरिका से संबंध रखना चाहते हैं। अमेरिका से रिश्ते का मतलब यह कतई नहीं होगा कि हमारे यहां सेकिसी की जान जाए।
5. पाक प्रधानमंत्री के मुताबिक- अगर चीन के साथ हमारे कारोबारी संबंध हैं तो ऐसा ही रिश्ता अमेरिकाके साथ भी है। माना यह जाता है कि अगर आप अमेरिकी राजनीति के साथ सहमत नहीं है तो आपअमेरिका विरोधी हैं। इसे तो साम्राज्यवादी नजरिया माना जाना चाहिए।
‘पाक पर भरोसा नहीं किया’
6. इमरान ने कहा- आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी युद्ध में हम भी शामिल थे, हमारे नागरिक-सैनिकमारे गए लेकिन लादेन के खात्मे में हमारे सहयोगियों को हम पर ही भरोसा नहीं था।
‘कश्मीर अभी भी प्रमुख मुद्दा’
7. पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने कहा है कि भले ही सरकार ने करतारपुरकॉरिडोर खोलने का फैसला किया हो, लेकिन कश्मीर अभी भी प्रमुख मुद्दा है। पाक सरकार जम्मू-कश्मीरविवाद पर बैकफुट पर नहीं आएगी। करतारपुर कॉरिडोर को खोलने का फैसला सिखों की भावनाओं कोध्यान में रखकर लिया गया है।
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