पहली बार मृत महिला के गर्भाशय प्रत्यारोपण के बाद मां ने दिया बच्ची को जन्म



मां ने 2.5 किलोग्राम की स्वस्थ बच्ची को जन्म दियाथा।

ब्राजील में हुए ऑपरेशन के पहले मृत महिला सेगर्भाशय प्रत्यारोपण के 10 प्रयास नाकाम रहे

32 साल की महिला को 45 साल की मृतक का गर्भाशयप्रत्यारोपित किया गया, 7 महीने बाद निषेचित अंडेकोख में रखे

पेरिस. मेडिकल हिस्ट्री में पहली बार किसी मृत महिलाके गर्भाशय प्रत्यारोपण (यूटरस ट्रांसप्लांट) के बाद एकमां ने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। ब्राजील में यह ऑपरेशन दो साल पहले किया गया था, लेकिन इसबात की जानकारी अभी सामने आई। लेंसेट जर्नल में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि अब यूटरस कीसमस्या से जूझ रही महिलाओं को इससे मदद मिल सकेगी।

2016 में पैदा हुई थी बच्ची

1. यूटरस प्रत्यारोपण के बाद मां ने सितंबर 2016 में बच्ची को जन्म दिया था। अब तक यूटरस कीपरेशानी से जूझ रही महिलाओं के पास गोद लेने या सरोगेट (किराए की कोख) मां का ही विकल्प था।

2. 2013 में स्वीडन में पहली बार जीवित महिला का गर्भाशय प्रत्यारोपित किया गया था। इसके बाद सेअब तक 10 बार ऐसा हो चुका है। जीवित महिला से गर्भाशय मिलना काफी मुश्किल होता है। लिहाजाडॉक्टर ऐसी प्रक्रिया की खोज में थे जिससे मृत महिला का यूटरस इस्तेमाल किया जा सके।

3. ब्राजील में कामयाब ऑपरेशन के पहले अमेरिका, चेक रिपब्लिक और तुर्की में मृत महिला के गर्भाशयप्रत्यारोपण के 10 प्रयास किए गए। वैज्ञानिकों के मुताबिक- इनफर्टिलिटी 10-15% जोड़ों को प्रभावितकरती है। 500 में से एक महिला को गर्भाशय की संरचना, गर्भाशयोच्छेदन (हिस्टेरेक्टॉमी) और संक्रमणहोता है, जिसकी वजह से उसे गर्भधारण में परेशानी होती है।

4. साओ पाउलो यूनिवर्सिटी के डॉक्टर दानी एजेनबर्ग के मुताबिक- हमारे नतीजे बताते हैं कि नयाविकल्प इनफर्टिलिटी से जूझ रही महिलाओं के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। 

मरने के बाद कई लोग अंग दान करना चाहते हैं

5. डॉ. एजेनबर्ग के मुताबिक- मरने के बाद कई लोग अपने अंग दान करना चाहते हैं। इनकी संख्याजीवित रहते हुए अंग दान करने वालों से कहीं ज्यादा होती है। 32 साल की जिस महिला में गर्भाशयप्रत्यारोपित किया गया, वह एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थी। गर्भाशय देने वाली 45 वर्षीय महिला कीस्ट्रोक से मौत हो गई थी।

6. 10 घंटे के अंदर मृत महिला से गर्भाशय को निकालकर उसे दूसरी महिला में प्रत्यारोपित कर दियागया। शरीर नए अंग को खारिज न कर दे, इसके लिए एंटी-माइक्रोबियल्स, एंटी-ब्लड क्लॉटिंग ट्रीटमेंटसमेत 5 अलग-अलग दवाएं भी दी गईं।

7. 5 महीने बाद गर्भाशय को शरीर द्वारा स्वीकार न करने के कोई संकेत नहीं मिले और महिला कामासिक चक्र नियमित पाया गया। प्रत्यारोपण के 7 महीने बाद महिला निषेचित अंडे इम्प्लांट किए गए।10 दिन डॉक्टरों ने उसके गर्भधारण की सूचना दी। 32 हफ्ते तक प्रेग्नेंसी नॉर्मल थी। 36वें हफ्ते में महिलाने 2.5 किलो की बच्ची को सीजेरियन तरीके से जन्म दिया।

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