मंत्रिमंडल / 2 दिन से दिल्ली में हैं कमलनाथ, गहलोत और बघेल, राहुल आज फाइनल कर सकते हैं नाम


राहुल आज तीनों राज्यों में मंत्रिमंडल के लिए नाम फाइनल कर सकते हैं। 

मध्यप्रदेश, कमलनाथ ने एके एंटनी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बैठक की 

राजस्थान, प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने मंत्रियों के नामों को लेकर गहलोत-पायलट से मंथन किया 

छत्तीसगढ़, पुनिया और वोरा से मिले भूपेश बघेल, 10 विधायक ले सकते हैं मंत्री पद की शपथ 

नई दिल्ली. मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कैबिनेट गठन के लिए माथापच्ची बढ़ रही है। गुरुवार रात से ही तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कमलनाथ और भूपेश बघेल दिल्ली में हैं। शुक्रवार को मंत्रिमंडल के नाम तय होने की संभावना थी। लेकिन, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दोपहर बाद हिमाचल प्रदेश से दिल्ली लौटे। ऐसे में मुख्यमंत्रियों के साथ होने वाली बैठक नहीं हो पाई। अब शनिवार को राहुल के साथ बैठक है। माना जा रहा है कि राहुल आज तीनों राज्यों में मंत्रिमंडल के लिए नाम फाइनल करेंगे। 

मध्यप्रदेश: एंटनी, कमलनाथ और सिंधिया के बीच हुई चर्चा 

कमलनाथ ने शुक्रवार को दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेता एके एंटनी और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बैठक की। देर रात तक चली इस बैठक में तीनों नेताओं के बीच मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले नामों पर चर्चा हुई। 

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को एंटनी, नाथ और सिंधिया राहुल से मिलेंगे। उनसे चर्चा के बाद मंत्रिमंडल का अनुमोदन करवा लिया जाएगा। 

कमलनाथ ने भी इस बात के संकेत दिए हैं कि अभी मंत्रिमंडल के गठन की कोई जल्दी नहीं, एक दो दिन का समय है। इससे माना जा रहा है कि 24 दिसंबर को प्रदेश के मंत्रिमंडल को शपथ दिलवाए जाने की संभावना है। 

मंत्रिमंडल गठन में आगामी लोकसभा के समीकरणों को ध्यान में रखा जा रहा है। मंत्रिमंडल का आकार छोटा होगा यानी 15 से 20 विधायकों को ही शामिल करने की बात चल रही है। 4 निर्दलीय विधायकों में से 2 को कहीं और एडजस्ट किया जाएगा। 

मंत्रिमंडल में सबसे ज्यादा तरजीह मालवा और निमाड़ को मिलेगी, इस क्षेत्र की 66 में से सबसे ज्यादा 36 विधायक विधानसभा पहुंचे हैं। इसके बाद ग्वालियर-चंबल अंचल की 34 सीटों में से कांग्रेस ने 26 सीटें जाती है, इसलिए इस क्षेत्र का भी खासा प्रतिनिधित्व तय है। 

राजस्थान: मंत्री बनने के लिए 15 से 20 विधायक भी दिल्ली में डाले डेरा 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की शुक्रवार को राहुल के साथ बैठक होनी थी। लेकिन यह बैठक स्थगित हो गई। अब शनिवार को बैठक हो सकती है। 

राजस्थान प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे के साथ पूरे दिन अलग-अलग गहलोत और पायलट के बीच मंत्रियों के नामों को लेकर मंथन चलता रहा। हालांकि कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। 

मंत्रिमंडल में अपने विश्वसनीय ज्यादा लाने के लिए गहलोत और पायलट खेमा दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय के चक्कर काट रहा है। मंत्री बनने के लिए अभी भी 15 से 20 विधायक दिल्ली में मौजूद हैं। 

छत्तीसगढ: पुनिया और वोरा से मिले भूपेश 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंत्रिमंडल गठन के लिए शुक्रवार दोपहर प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया और मोतीलाल वोरा से मिले। उनके साथ विधायक सत्यनारयण शर्मा, अमरजीत भगत, जयसिंह अग्रवाल और सलाहकार राजेश तिवारी, विनोद वर्मा और रुचिर गर्ग भी थे। भूपेश गुरुवार को ही कह चुके हैं कि वे मंत्रियों की लिस्ट लेकर ही लौटेंगे। 

बघेल शुक्रवार को मल्लिकार्जुन खड़गे और शरद यादव से भी मिले। उधरए मंत्री पद के लिए दर्जनभर विधायक पहले से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। 

भूपेश 68 में से सिर्फ 13 विधायकों को ही मंत्री बना सकते हैं। इनमें से खुद भूपेश बतौर सीएम और टीएस सिंहदेव व ताम्रध्वज साहू मंत्री के रूप में शपथ ले चुके हैं। अब बचे 10 मंत्री पद। 68 विधायकों में से 20 तो ऐसे हैं जो 2 से 8 बार चुने गए हैं। भाजपा के दिग्गजों को हराकर पहली बार के विधायक भी मंत्री बनने की दौड़ लगा रहे हैं। 

दिल्ली में एक चैनल से भूपेश ने कहा कि राज्य में हम 13 से ज्यादा मंत्री नहीं बना सकते। क्योंकि, विधानसभा में सदस्यों की संख्या का 15% ही मंत्री बनाने का नियम है। 

भूपेश ने कहा कि वे जल्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग करेंगे कि तमिलनाडु में जनसंख्या के आधार पर 38 मंत्री बनाए गए हैं। जबकि उस राज्य का भौगोलिक क्षेत्रफल छत्तीसगढ़ से कम है। लिहाजा क्षेत्रफल के आधार पर छत्तीसगढ़ में मंत्री बनाए जाने चाहिए। इसके लिए संविधान संशोधन करना होगा। एक राज्य को अनुमति नहीं मिल सकती।

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