ईसा मसीह के 10 रहस्यमयी बातें?


ईसा मसीह के बारे में कई तरह की बातें वक्त-वक्त परसामने आती रही हैं। उनमें से कुछ को विवादित मानागया और कुछ पर अभी भी शोध जारी है। हालांकि इनबातों के सच होने का दावा हम नहीं करते। आओ जानतेहैं ऐसी ही 10 रहस्यमयी बातों के संबंध में जानकारी।उक्त जानकारी का आधार समय-समय पर प्रकाशितखबरें और रिपोर्ट हैं।

13 से 29 वर्ष के बीच कहां रहे ईसा मसीह?

एक यहूदी बढ़ई की पत्नी मरियम (मेरीद्ध के गर्भ से यीशु का जन्म बेथलेहेम में हुआ। ईसा जब 12 वर्षके हुए, तो यरुशलम में 2 दिन रुककर पुजारियों से ज्ञान चर्चा करते रहे। 13 वर्ष की उम्र में वे कहां चले गएथे, यह कोई नहीं जानता। 13 साल से 30 साल की उम्र के मध्य में क्या किया, यह रहस्य की बात है।बाइबल में उनके इन वर्षों के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं मिलता है। 30 वर्ष की उम्र में उन्होंने येरुशलममें यूहन्ना (जॉन) से दीक्षा ली। दीक्षा के बाद वे लोगों को शिक्षा देने लगे। ज्यादातर विद्वानों के अनुसारसन् 29 ई. को प्रभु ईसा गधे पर चढ़कर येरुशलम पहुंचे और वहीं उनको दंडित करने का षड्यंत्र रचा गया।अंतत: उन्हें विरोधियों ने पकड़कर क्रूस पर लटका दिया। उस वक्त उनकी उम्र थी लगभग 33 वर्ष।

रविवार को यीशु ने येरुशलम में प्रवेश किया था। इस दिन को ‘पाम संडे’ कहते हैं। शुक्रवार को उन्हें सूलीदी गई थी इसलिए इसे ‘गुड फ्राइडे’ कहते हैं और रविवार के दिन सिर्फ एक स्त्री (मेरी मेग्दलेन) ने उन्हेंउनकी कब्र के पास जीवित देखा। जीवित देखे जाने की इस घटना को ‘ईस्टर’ के रूप में मनाया जाता है।उसके बाद यीशु कभी भी यहूदी राज्य में नजर नहीं आए।

क्या 25 दिसंबर ही है ईसा मसीह का जन्मदिवस?

हाल ही में बीबीसी पर एक रिपोर्ट छपी थी उसके अनुसार यीशु का जन्म कब हुआ, इसे लेकर एकराय नहींहै। कुछ धर्मशास्त्री मानते हैं कि उनका जन्म वसंत में हुआ था, क्योंकि इस बात का जिक्र है कि जब ईसाका जन्म हुआ था, उस समय गड़रिये मैदानों में अपने झुंडों की देखरेख कर रहे थे। अगर उस समयदिसंबर की सर्दियां होतीं, तो वे कहीं शरण लेकर बैठे होते। और अगर गड़रिये मैथुन काल के दौरान भेड़ोंकी देखभाल कर रहे होते तो वे उन भेड़ों को झुंड से अलग करने में मशगूल होते, जो समागम कर चुकीहोतीं। ऐसा होता तो ये पतझड़ का समय होता। मगर बाइबल में ईसा के जन्म का कोई दिन नहीं बतायागया है। इतिहासकारों के अनुसार रोमन काल से ही दिसंबर के आखिर में पैगन परंपरा के तौर पर जमकरपार्टी करने का चलन रहा है। यही चलन ईसाइयों ने भी अपनाया और इसे नाम दिया ‘क्रिसमस’

कैसा था ईसा मसीह का चेहरा?

अक्सर चित्रों में ईसा मसीह को एक सुंदर गोरा व्यक्ति बताया जाता है, लेकिन क्या यह सच है? 2001 मेंप्रकाशित बीबीसी की एक रिपोर्ट Looking for the historical Jesus के अनुसार अपनी सालों की रिसर्चऔर कड़ी मेहनत के बाद फॉरेंसिक साइंटिस्ट रिचर्ड नैवे ने ईसा मसीह के चेहरे का मॉडल दुनिया के सामनेपेश किया है। ईसा के चेहरे का यह मॉडल वर्तमान में देखे जाने वाले चित्रों से एकदम अलग है। रिचर्ड नेइसराइली अर्चिओलॉजिकल साइट्स पर मिली 3 खोपड़ियों पर रिसर्च कर उन सारे पैमानों के साथमिलाकर देखा, जो ईसा की शक्ल के बारे में लिखे गए थे।

नैवे ने जीसस को एक मिडल ईस्ट के ट्रेडिशनल यहूदी की तरह दिखाया है। उनका फेस उत्तरी इसराइल केगेलिली शहर के लोगों से मिलता है। एक्सपर्ट की रिसर्च टीम ने कई प्रसिद्ध लोगों जैसे मैसेडोनिया केफिलीप सेकंड, फादर ऑफ एलेक्जेंडर द ग्रेट और फ्रिजिया के किंग मिडास के चेहरे को जोड़कर नया चेहराबनाया है। उन्होंने एक इसराइली आर्कियोलॉजिस्ट से यहूदी स्कल (खोपड़ी) लिया और स्कल की एक्स-रेस्लाइस क्रिएट की। फिर कम्प्यूटर की मदद से उसमें मसल्स, स्किन जोड़े गए। टीम ने उसमें दाढ़ी बढ़ाईऔर सिर के बाल छोटे रखे। ये घुंघराले बाल थे। दरअसल, ट्रेडिशनल यहूदी हुलिया इसी प्रकार का होता है।

टीम का मानना है कि जीसस की लंबाई 5 फीट के ऊपर रही होगी। जीसस के इस नए फेस के अनुसारउनका चेहरा बड़ा, काली आंखें, छोटे घुंघराले काले बाल और एक जंगली दाढ़ी के साथ चेहरे का रंग गहरागेहूंआ। हालांकि एक्सपर्ट यह दावा नहीं करते हैं कि यहीं ईसा मसीह का चेहरा होगा लेकिन यह उनके चेहरेसे सबसे करीबी चेहरा जरूर हो सकता है।

क्या भारत में रहे थे ईसा मसीह?

बहुत से लोग दावा करते हैं कि वे क्रॉस पर चढ़े जरूर थे लेकिन उनकी मौत नहीं हुई थी। जब क्रॉस परचढ़ाया गया था तब उनकी उम्र लगभग 33 वर्ष थी। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि भारत के कश्मीरमें जिस बौद्ध मठ में उन्होंने 13 से 29 वर्ष की उम्र में शिक्षा ग्रहण की थी उसी मठ में पुन: लौटकर अपनासंपूर्ण जीवन वहीं बिताया। कश्मीर में उनकी समाधि को लेकर हाल ही में बीबीसी पर एक रिपोर्ट भीप्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार श्रीनगर के पुराने शहर की एक इमारत को ‘रौजाबल’ के नाम से जानाजाता है। यह रौजा एक गली के नुक्कड़ पर है और पत्थर की बनी एक साधारण इमारत है जिसमें एकमकबरा है, जहां ईसा मसीह का शव रखा हुआ है। श्रीनगर के खानयार इलाके में एक तंग गली में स्थिति हैरौजाबल।

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