राजस्थान में पिछले पांच चुनाव का ट्रेंड, 1 से 2% कम-ज्यादा मतदान से बदल गई सरकार



* 1993 से 2013 तक के चुनावों में कभी 1% कम तो कभी 3 से 4% अधिक मतदान से सरकारें बदल गईं 

* राजस्थान की 15वीं विधानसभा के लिए 74.08% मतदान हुआ, जो 2013 के चुनावों से करीब डेढ़ फीसदी कम 

जयपुर. राजस्थान की 15वीं विधानसभा के लिए 74.08% मतदान हुआ। जो 2013 के चुनावों से करीब डेढ़ फीसदी कम है। अगर पिछले छह चुनावों के आंकड़े देखें तो महज 1 से 2% कम-ज्यादा वोटिंग से भी सत्ता बदल जाती है। 2013 में मोदी लहर के कारण मतदान में 9% का उछाल आया था। इससे पहले 1993 से 2013 तक के चुनावों में ऐसा ट्रेंड चल रहा था कि कभी 1% कम तो कभी 3 से 4% अधिक मतदान से सरकारें बदल गईं। 

1993: 3.5% वोटिंग बढ़ी, भाजपा- 95 सीटें 

प्रदेश में राष्ट्रपति शासन था। चुनाव में 3.50% के इजाफे के साथ 60.59% वोट पड़े। भाजपा को पहली बार 13% मतों के उछाल के साथ 38.60% वोट और 95 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने 76 सीटें मिलीं। 

1998 : 3% मतदान बढ़ा, कांग्रेस- 153 सीटें 

सत्ता विरोधी लहर के कारण 3% मतदान बढ़ा। कांग्रेस ने अब तक की सबसे ज्यादा 153 सीटें जीतीं। यानी 77 सीटों के इजाफे के साथ। भाजपा 95 से सीधे 33 पर आ गई और 62 सीटों का नुकसान हुआ। 

2008 : 1% कम वोटिंग, कांग्रेस. 96 सीटें 

66.49% मतदान हुआ, जो गत चुनाव से करीब 1% कम रहा। भाजपा को 42 सीटों के नुकसान के साथ 78 सीटें मिलीं। कांग्रेस को 30 सीटों का फायदा हुआ और उसे 96 सीटें मिलीं। 

2013 : 9% ज्यादा वोटिंग, भाजपा- 163 सीटें 

भाजपा ने मोदी को पीएम प्रत्याशी घोषित किया था। मोदी लहर चल रही थी। पहली बार 9% मतदान बढ़कर 66 से 75% पर जा पहुंचा। भाजपा को सर्वाधिक 163 सीटें मिलीं। कांग्रेस 21 पर सिमट गई।



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