Paytm डाटा लीक का मामला सामने आया, दरोगा के खाते से उड़ाये 1 लाख रुपये
पेटीएम डाटा लीक का पहला केस सामने आया है। गाजियाबाद में तैनात यूपी पुलिस के सब इंस्पेक्टर के खाते से साइबर अपराधियों ने एक लाख रुपये उड़ा लिए। दरोगा के पेटीएम में ही डेबिट कार्ड की सम्पूर्ण जानकारी सुरक्षित थी। पूरे मामले में मेरठ और शामली की साइबर क्राइम सेल ने जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।
गाजियाबाद जिले के एक थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर के मोबाइल नंबर पर 29 अक्तूबर को एक कॉल आई। कॉल करने वालों ने कहा कि आपने ऑनलाइन शॉपिंग की थी और उसमें आपका इनाम निकला है। इसके बाद कॉल कट गई। सब इंस्पेक्टर के बैक कॉल करते ही खाते से एक लाख रुपये कट गए। 12 बार हुई ट्रांजेक्शन में पेटीएम और फाइनेंशियल सॉफ्टवेयर सिस्टम (एफएसएस) के जरिये ऑनलाइन शॉपिंग का भुगतान हुआ है। सब इंस्पेक्टर का खाता एक्सिस बैंक में है। उन्होंने पेटीएम से दो बार बिजली बिल का भुगतान करते वक्त डेबिट कार्ड की जानकारी दर्ज की थी।
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले दिनों 50 करोड़ की फिरौती के लिए पेटीएम का डाटा लीक करने वाले कर्मचारियों से जुड़े साइबर अपराधी ही इस तरह की ठगी कर सकते हैं। ऐसे में उनके पास और भी पेटीएम यूजर्स का निजी डाटा हो सकता है जो और लोगों को भी चपत लगा सकते हैं। इस ठगी की एकदम नई मॉडस ऑफ ऑपरेंडी ने साइबर विशेषज्ञों को भी सकते में ला दिया है। शामली साइबर क्राइम सेल के प्रभारी कर्मवीर सिंह ने बताया कि इस तरह की ठगी का यह पहला मामला है। पेमेंट करने वाली गेटवे कंपनियों से इस बारे में पत्राचार चल रहा है।
मिस्ड कॉल से भी वैरीफिकेशन
कुछ कंपनियों ने वैरीफिकेशन का तरीका बदल दिया है। अब वे वैरीफिकेशन के लिए मिस्ड कॉल करने को बोलती हैं। संभवत: इस केस में भी ऐसा ही हुआ। सब इंस्पेक्टर ने जैसे ही कॉलकर्ता के मोबाइल पर कॉल की तो वह ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम से कनेक्ट होकर कट गई और खाते से रुपये निकल गए।
साइबर ठगी से ऐसे बचें
ऑनलाइन भुगतान करते वक्त एप्लीकेशन-कम्प्यूटर में कार्ड की जानकारी सेव न करें। नेटबैंकिंग में अपने खाते का पासवर्ड मजबूत बनाएं। हर महीने नेटबैंकिंग, ई-मेल, डेबिट-क्रेडिट कार्ड के पासवर्ड बदलते रहें। यदि किसी स्कीम के बारे में कॉल आती है तो बैककॉल न करें। ऑनलाइन पेमेंट सॉफ्टवेयर पर हर वक्त लॉग-इन न रहें, हर ट्रांजेक्शन के बाद लॉगआउट करें।

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