दिल्ली को मिला सिग्नेचर ब्रिज:
दिल्ली के सुनहरे इतिहास में एक और अध्याय रविवारको उस समय जुड़ गया जब सिग्नेचर ब्रिज को यातायातके लिए खोला गया। आज हम उस दुखद घटना के बारेमें जानेंगे।
हाइलाइट्स
* 18 नवंबर, 1997 को वजीराबाद में यमुना पर बने पुल पर हुई थी बस दुर्घटना।
* इसमें 28 स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी। जिसके बाद एक चौड़ा पुल बनाने का प्रस्ताव रखा गया।
* कई डेडलाइन मिस होने के बाद आखिरकार 4 नवंबर, 2018 को पुल का उद्घाटन हो गया।
रविवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वजीराबाद के पास यमुना नदी पर बने सिग्नेचर ब्रिज कोदिल्ली को समर्पित किया। क्या आपको पता है कि नवंबर 1997 की एक दुखद घटना के बाद सिग्नेचरब्रिज का प्रस्ताव साल 1998 में रखा गया था। आइए इस मौके पर उस दुखद घटना के बारे में जानते हैंजिससे सबक भी लिया जा सकता है.....
दुखद घटना
18 नवंबर, 1997 की सुबह थी। कश्मीरी गेट पर स्थित लडलो कैसल नंबर-2 स्कूल की एक बस बच्चों कोलेकर स्कूल जा रही थी। बस में 66 बच्चों को बैठाने की क्षमता थी जबकि उसमें 100 से ऊपर छात्रों कोभर लिया गया था। इसके अलावा स्कूल के दो शिक्षक भी बस में थे। जब वजीराबाद में यमुना पर बने दोलेन वाले पुल पर बस पहुंची तो बालू के एक ढेर से टकरा गई। टक्कर के बाद बस बेकाबू हो कर रेलिंगतोड़ते हुए यमुना नदी में जा गिरी। वैसे अगर बस की रफ्तार कम होती तो शायद यह हादसा न होताक्योंकि उस स्थिति में लोहे की रेलिंग गाड़ी को रोक लेती। लेकिन एक तो स्पीड ज्यादा और ऊपर से बसकी क्षमता से ज्यादा बच्चे होने की वजह से हादसा को होने से टाला नहीं जा सका। इस दुर्घटना में करीब28 बच्चों की मौत हो गई थी।
घटना को भयावह बनाने में पुल के संकीर्ण होने की भी बड़ी भूमिका थी। पुल संकीर्ण होने की वजह से उसपर हमेशा की तरह जाम लगा हुआ था। इस वजह से घटना के करीब 40 मिनट बाद ही पहला फायर इंजनऔर क्रेन घटनास्थल पर पहुंच सका। तब तक काफी नुकसान हो चुका था। नुकसान को थोड़ा कम करने मेंअगर किसी की भूमिका अहम थी तो वह स्थानीय लोगों की। स्थानीय लोगों ने तुरंत पानी में गोतालगाकर बच्चों को बचाने का अभियान शुरू कर दिया था।
घटना के बाद काफी हंगामा मचा। उस समय दिल्ली के मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा थे। उन्होंने मामले कीमैजिस्ट्रेट जांच कराने और स्कूल के प्रिंसिपल पर कार्रवाई करने की घोषणा की थी। सभी बच्चों के लिए 1-1 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा भी की गई थी।
इसको भी पढ़ें: सिग्नेचर ब्रिज से बस 3 महीने बाद दिखने लगेगी पूरी दिल्ली
महसूस की गई चौड़े पुल की जरूरत
इस घटना के बाद यमुना पर बड़े पुल की जरूरत महसूस की गई और दिल्ली सरकार ने इसके समानांतरएक अन्य चौड़ा पुल निर्माण की योजना बनाई। साल 1998 के अंत तक दिल्ली सरकार ने इस पुल कीयोजना के ड्राफ्ट को अंतिम रूप दे दिया था। लेकिन पुल निर्माण की परियोजना कई कारणों से अधर मेंलटकी रही। 2004 में इस पर जोरोशोर से काम शुरू हुआ और कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले पूरा करने कालक्ष्य रखा गया। खैर 2010 की डेडलाइन पर यह बनकर तैयार नहीं हो सका। उसके बाद 2013 में इसकीनई डेडलाइन साल 2016 रखी गई लेकिन यह डेडलाइन भी निकल गई। उसके बाद कई बार डेडलाइन तयकी गई और निकलती गई। अंत में जाकर 4 नवंबर, 2018 को इसका उद्घाटन हो गया।
हाइलाइट्स
* 18 नवंबर, 1997 को वजीराबाद में यमुना पर बने पुल पर हुई थी बस दुर्घटना।
* इसमें 28 स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी। जिसके बाद एक चौड़ा पुल बनाने का प्रस्ताव रखा गया।
* कई डेडलाइन मिस होने के बाद आखिरकार 4 नवंबर, 2018 को पुल का उद्घाटन हो गया।
रविवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वजीराबाद के पास यमुना नदी पर बने सिग्नेचर ब्रिज कोदिल्ली को समर्पित किया। क्या आपको पता है कि नवंबर 1997 की एक दुखद घटना के बाद सिग्नेचरब्रिज का प्रस्ताव साल 1998 में रखा गया था। आइए इस मौके पर उस दुखद घटना के बारे में जानते हैंजिससे सबक भी लिया जा सकता है.....
दुखद घटना
18 नवंबर, 1997 की सुबह थी। कश्मीरी गेट पर स्थित लडलो कैसल नंबर-2 स्कूल की एक बस बच्चों कोलेकर स्कूल जा रही थी। बस में 66 बच्चों को बैठाने की क्षमता थी जबकि उसमें 100 से ऊपर छात्रों कोभर लिया गया था। इसके अलावा स्कूल के दो शिक्षक भी बस में थे। जब वजीराबाद में यमुना पर बने दोलेन वाले पुल पर बस पहुंची तो बालू के एक ढेर से टकरा गई। टक्कर के बाद बस बेकाबू हो कर रेलिंगतोड़ते हुए यमुना नदी में जा गिरी। वैसे अगर बस की रफ्तार कम होती तो शायद यह हादसा न होताक्योंकि उस स्थिति में लोहे की रेलिंग गाड़ी को रोक लेती। लेकिन एक तो स्पीड ज्यादा और ऊपर से बसकी क्षमता से ज्यादा बच्चे होने की वजह से हादसा को होने से टाला नहीं जा सका। इस दुर्घटना में करीब28 बच्चों की मौत हो गई थी।
घटना को भयावह बनाने में पुल के संकीर्ण होने की भी बड़ी भूमिका थी। पुल संकीर्ण होने की वजह से उसपर हमेशा की तरह जाम लगा हुआ था। इस वजह से घटना के करीब 40 मिनट बाद ही पहला फायर इंजनऔर क्रेन घटनास्थल पर पहुंच सका। तब तक काफी नुकसान हो चुका था। नुकसान को थोड़ा कम करने मेंअगर किसी की भूमिका अहम थी तो वह स्थानीय लोगों की। स्थानीय लोगों ने तुरंत पानी में गोतालगाकर बच्चों को बचाने का अभियान शुरू कर दिया था।
घटना के बाद काफी हंगामा मचा। उस समय दिल्ली के मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा थे। उन्होंने मामले कीमैजिस्ट्रेट जांच कराने और स्कूल के प्रिंसिपल पर कार्रवाई करने की घोषणा की थी। सभी बच्चों के लिए 1-1 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा भी की गई थी।
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महसूस की गई चौड़े पुल की जरूरत
इस घटना के बाद यमुना पर बड़े पुल की जरूरत महसूस की गई और दिल्ली सरकार ने इसके समानांतरएक अन्य चौड़ा पुल निर्माण की योजना बनाई। साल 1998 के अंत तक दिल्ली सरकार ने इस पुल कीयोजना के ड्राफ्ट को अंतिम रूप दे दिया था। लेकिन पुल निर्माण की परियोजना कई कारणों से अधर मेंलटकी रही। 2004 में इस पर जोरोशोर से काम शुरू हुआ और कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले पूरा करने कालक्ष्य रखा गया। खैर 2010 की डेडलाइन पर यह बनकर तैयार नहीं हो सका। उसके बाद 2013 में इसकीनई डेडलाइन साल 2016 रखी गई लेकिन यह डेडलाइन भी निकल गई। उसके बाद कई बार डेडलाइन तयकी गई और निकलती गई। अंत में जाकर 4 नवंबर, 2018 को इसका उद्घाटन हो गया।

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