अंतरिक्ष-इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के 20 साल, 90 मिनट में 28 हजार कि0मी0 की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाता है



* आईएसएस पर अब तक 18 देशों के 232 अंतरिक्ष यात्री भेजे गए 

* इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का वजन 4.20 लाख किलो, यह छह बेडरूम के घर जितनी बड़ा 

* 15 देशों की मदद से अब तक 19 बार सैटेलाइट भेजकर यहां सुविधाएं जुटाई गईं 

वॉशिंगटन. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) को अंतरिक्ष में भेजने के 20 साल पूरे हो गए हैं। इसे नवंबर 1998 में अंतरिक्ष में भेजा गया था। 2 नवंबर 2000 के बाद से यहां एस्ट्रोनॉट्स का लगातार आना-जाना जारी है। आईएसएस पर अब तक 18 देशों के 232 अंतरिक्ष यात्री भेजे जा चुके हैं। इस वक्त स्टेशन में नासा के एस्ट्रोनॉट लेरॉय शियाओ मौजूद हैं, जो स्पेस स्टेशन में आई गड़बड़ियों को दूर करने के लिए स्पेसवॉक भी करते हैं। 

स्टेशन इंजीनियर गैरी ओल्सन बताते हैं कि आईएसएस नासा की नई सोच को परिभाषित करता है। ओल्सन 1988 से 1993 तक नासा के स्पेस स्टेशन प्रोग्राम ऑफिस में रहे। उनके मुताबिक, आईएसएस पर 19 बार स्पेसक्राफ्ट भेजे जा चुके हैं, जिससे हर बार वहां कुछ नई चीजें जुटाई गईं। वहां जितनी बार एस्ट्रोनॉट्स को भेजा गया, हर बार अलग स्पेसक्राफ्ट इस्तेमाल किया गया। 

काफी चुनौती भरा है स्पेस स्टेशन में रहना 

आईएसएस को धरती से 400 किमी ऊपर स्थापित किया गया है। 28 हजार किमी/घंटे की स्पीड से हर 90 मिनट में यह धरती का एक चक्कर पूरा करता है। इतनी स्पीड से एक दिन में पृथ्वी से 3.84 लाख किमी दूर स्थित चंद्रमा पर जाकर लौटा जा सकता है। शियाओ के मुताबिक, स्पेस स्टेशन में रहना काफी चुनौतीभरा है। एस्ट्रोनॉट को रिपेयरिंग के लिए कई बार स्पेसवॉक करना पड़ता है। हमें जो इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स मिलते हैं, वे अलग-अलग देशों में बने होते हैं। उनका इलेक्ट्रिक सिस्टम भी अलग होता है। लिहाजा उन्हें फिट करते वक्त काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। 


2024 तक काम करेगा स्पेस स्टेशन 

आईएसएस पर रूस, जापान, कनाडा, कजाखिस्तान समेत 18 देशों के 232 अंतरिक्ष यात्री जा चुके हैं। भारतीय मूल की कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स भी यहां जा चुकी हैं। आईएसएस पर सबसे ज्यादा वक्त (534 दिन) गुजारने का रिकॉर्ड नासा की पैगी व्हाइटसन के नाम है। यह स्पेस स्टेशन 2024 तक काम करेगा। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने प्रस्ताव रखा है कि 2025 के बाद स्टेशन को चालू नहीं रखा जाएगा। जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में स्पेस पॉलिसी इंस्टीट्यूट के प्रोण् जॉन लॉग्सडन के मुताबिक, कोई सरकार स्पेस स्टेशन पर कब तक पैसा खर्च करेगी, यह पेचीदा मसला है। बेहतर होगा कि कोई निजी कंपनी इसका ऑपरेशन अपने हाथ में ले ले। 


10 साल तक कोई दिक्कत नहीं 

एस्ट्रोनॉट शियाओ कहते हैं कि स्पेस स्टेशन को महज 15 साल के लिए डिजाइन किया गया था। हालांकि, अब तक उसमें कोई दिक्कत नहीं आई। माना जा रहा है कि यह 2028 तक चल सकता है। शियाओ ने कहा कि छह साल बाद ही इसे खत्म करने की बात से मुझे दुख है। इसे कभी भी फायदे के लिहाज से नहीं बनाया गया। कोई भी सरकार रिसर्च के कामों पर हो रहे खर्च में फायदा कैसे देख सकती है? 

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