दांतों के बीच खाना फंसा है तो हो सकती है, ये गंभीर बीमारी
मेडिकल एथिक्वस में इन बातों का उल्लेख किया गया है। हमारा काम केवल मरीज को स्वस्थ करना है।
आज के समय में शुद्ध आहार नहीं मिल रहा है, सब्जियां कहीं न कहीं हाइजीनिंग हो रही हैं। ऐसे में खाद्य सामग्री दांतों में फंस गई तो मुंह के कैंसर से ग्रसित होने से कोई नहीं रोक सकता। शुक्रवार से शुरू हुए तीन दिवसीय स्टेट डेंटल कांफ्रेंस में डॉ. शौर्य शर्मा ने यह बा
तें कही। पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि देश में सर्वाधिक कैंसर मुंह के हो रहे हैं। इसकी शुरुआत दांतों से ही होती है। डेंटिस्ट चाहें तो मरीज को शुरुआती दौर में आसानी से बचा सकता है। इसके अलावा दांतों से चेहरे को सुंदर दिखाने के लिए बोटाक्स का भी उपयोग हो रहा है।
इसका सबसे ज्यादा उपयोग फिल्म लाइन में किया जा रहा है। चेहरा तो सुंदर दिख रहा है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट गंभीर हैं। इन बातों को भी हमें ध्यान देना होगा। मेडिकल एथिक्वस में इन बातों का उल्लेख किया गया है। हमारा काम केवल मरीज को स्वस्थ करना है।
चाहे वह दांतों की बात हो या फिर जबड़ो के इलाज की। कार्यशाला में 1500 डेंटल डॉक्टर्स ने पंजीयन कराया है, जिसमें डेंटल के छात्र भी शामिल हैं। कांफ्रेंस में पहुंची चंडीगढ़ की डॉ.
लीना रावल ने जूनियर डेंटल डॉक्टर्स को कम्पोजिट फिलिंग सिस्टम के बारे में बताया।
उन्होंने दांतों की सफाई की बारिकियों से शुरुआत की। बताया कि दांतों के बीच में फंसी खाद्य सामग्री को निकालने के लिए टीशू पेपर सबसे अच्छा विकल्प है। छोटा-छोटा काट कर उसे दांतों में फंसा कर आसानी से निकालें। इससे गंदगी तुरंत साफ हो जाती है।

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